समास किसे कहते हैं ? समास के प्रकार। समास के उदाहरण। Samas in Hindi।

समास किसे कहते हैं ? समास के प्रकार। समास के उदाहरण। Samas in Hindi।

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1 समास किसे कहते हैं ? समास के प्रकार। समास के उदाहरण। Samas in Hindi।
समास किसे कहते हैं
समास किसे कहते हैं

हिंदी व्याकरण के एक बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक “समास किसे कहते हैं” पर आप सभी का स्वागत है| आज हम हिंदी व्याकरण के एक अति महत्वपूर्ण टॉपिक “समास” के बारे में पढ़ने वाले है और इसमें हम निम्न टॉपिक के बारे में पढ़ने वाले हैं  समास किसे कहते हैं ? (samas kise kahte hain), समास की परिभाषा (samas ki paribhasha) , समास के प्रकार (samas ke prakar) और समास के उदाहरण(samas ke udaharan) , samas ke bhed।  आदि यह सभी हम विस्तार से जानने वाले हैं, तो चलिए शुरू करते हैं|

आज हम जानने वाले हैं ?

“समास किसे कहते हैं” (samas kise kahate hain)

“समास के प्रकार” (samas ke prakar)

“तत्पुरुष समास की परिभाषा” (tatpurush samas ki paribhasha)

“कर्मधारय समास किसे कहते हैं” (karmdharay samas kise kahte hain)

“अव्ययी भाव समास किसे कहते हैं”,

“द्वंद समास किसे कहते हैं” ,

“द्विगु समास किसे कहते हैं”,

“बहुब्रीहि समास किसे कहते हैं|

Samas in Hindi।

समास किसे कहते हैं ? (Samas kise kahate hain) :

समास शब्दों को संक्षिप्त करने की एक प्रक्रिया है जिसमें हम दो या दो से अधिक शब्दों का सहयोग करके एक नया सार्थक शब्द बनाते हैं सामान्यतः समास शब्दों को सूचित करने की एक व्याकरण की प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक शब्दों के सहयोग से एक नए सार्थक शब्द की रचना की जाती है समास शब्द का शाब्दिक अर्थ है “संक्षिप्तीकरण“|

समास के प्रयोग से कम से कम शब्दों में अधिक अर्थ व्यक्त करने की कोशिश की जाती है|

समास के संयोग से प्रमुख शब्द रह जाते है और सहायक शब्दो का लोप हो जाता है|

यदि आपको नही पता की सहायक शब्द क्या होते है तो मैं आपको बताता हु , जैसे

देशभक्ति – देश के लिए भक्ति

इसमें हमने “देशभक्ति” शब्द का समास विग्रह किया है, इसमें जो “के लिए” हैं उन्हें हम सहायक शब्द कहेंगे|

समास को अच्छी तरह से विस्तार से जाने के लिए आपको कुछ जरूरी शब्दों को समझना होगा जो की है सामासिक शब्द, समास विग्रह, पूर्व पद और उत्तर पद|

सामासिक शब्द :

समास के नियमों के अनुसार जब दो या दो से अधिक शब्दों के संयोग से एक नए सार्थक शब्द की रचना की जाती है तो उस नए शब्द को ही सामासिक शब्द कहते हैं इसे समस्त पद भी कहा जाता है|

समासिक शब्द बनने के बाद विभक्तियो के चिन्ह लुप्त हो जाते हैं|

उदाहरण के लिए ,

“दश हैं जिसके आनन – दशानन”

इस शब्द समूह से बने स्वतंत्र शब्द “दशानन” को सामसिक शब्द कहा जाता है|

 

“माता और पिता – माता-पिता”

इस शब्द समूह से बने स्वतंत्र शब्द “माता–पिता” को सामसिक शब्द कहा जाता है|

 

समास विग्रह क्या है ? 

जैसा कि आपने ऊपर देखा की सामासिक शब्द क्या है ? जिसमे हम दो या दो से अधिक शब्दो के संयोग से एक नए शब्द का निर्माण करते हैं|

इसमें हम समास विग्रह के बारे में जानेंगे जो की सामासिक शब्द से बिल्कुल उल्टा है|

जब किसी सामासिक शब्द को पृथक पृथक करके कई सरल शब्दों का निर्माण किया जाता है इसे ही समास विग्रह कहते हैं|

 

उदाहरण के लिए,

“विधानसभा – विधान के लिए सभा”

इसमें एक सामासिक शब्द “विधानसभा” को पृथक पृथक करके कई सरल शब्दों “विधान के लिए सभा” में बाट दिया गया है, यही समास विग्रह है|

“राजपुत्र – राजा का पुत्र”

इसमें एक सामासिक शब्द “राजपुत्र” को पृथक पृथक करके कई सरल शब्दों “राजा का पुत्र” में बाट दिया गया है, यही समास विग्रह है|

पूर्वपद : सामासिक शब्द के पहले शब्द या शब्दांश को पूर्वपद कहा जाता है|

उत्तरपद : सामासिक शब्द के अंतिम शब्द या शब्दांश को उत्तरपद कहा जाता है|

उदाहरण के लिए,

देशभक्ति – “देशभक्ति शब्द में पहला शब्द “देश” है, जिसे हम पूर्वपद कहेंगे|तथा अंतिम पद “भक्ति” है जिसे हम उत्तरपाद कहेंगे|

समास कितने प्रकार के होते हैं ?

पदो की प्रधानता के आधार पर सामान्यतः समास 6 प्रकार के होते हैं जो की निम्न हैं :

1) तत्पुरुष समास

2) कर्मधारय समास

3) बहुब्रिही समास

4) द्वंद समास

5) द्विगु समास

6) अव्ययी भाव समास

समास के प्रकार :

चलिए अब हम इन सभी समास के प्रकारों के बारे में विस्तार से जान लेते हैं –

तत्पुरुष समास :

तत्पुरुष समास की परिभाषा : जिस समाज में अंतिम शब्द यानी की उत्तर पद की प्रधानता होती है उसे तत्पुरुष समास कहते हैं| इसमें प्रायः प्रथम पद विशेषण होता है और द्वितीय पद विशेष्य होता है|

दूसरे शब्दों में, जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है तथा प्रथम पद गौण होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं|

तत्पुरुष समास के उदाहरण 

सत्याग्रह : सत्य के लिए आग्रह

राजसभा : राजा के लिए सभा

जलसमाधि : जल में समाधि

राजपुत्र : राजा का पुत्र

रहखर्च : राह के लिए खर्च

तत्पुरुष समास के भेद :

कर्म तत्पुरुष

करण तत्पुरुष

संप्रदान तत्पुरुष

संबंध तत्पुरुष

अधिकरण तत्पुरुष

अपादान तत्पुरुष

कर्मधारय समास :

कर्मधारय समास की परिभाषा : वह समास जिसका पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य होता है अथवा  प्रथम पद उपमेय तथा दूसरा पद उपमान होता है|

कर्मधारय समास में सामासिक शब्द का समास विग्रह करने पर दोनों पदों के बीच में “है जो” या “के समान” आता है|

कर्मधारय समास के उदाहरण 

महादेव – महान है जो देव

नरसिंह – सिंह रूपी नर

नवयुवक – नव है जो युवक

कमलनयन – कमल के समान नयन

नीलकमल – नीला है जो कमल

देहलता – देह रूपी लता

दुरात्मा – बुरी है जो आत्मा

श्वेतांबर – श्वेत है जो अंबर

चंद्र मुख – चंद्र के समान मुख

कर्मधारय समास के भेद :

विशेष्यो भय पद कर्मधारय समास

विशेषण पूर्व पद कर्मधारय समास

विशेष्य पूर्व पद कर्मधारय समास

विशेषण पूर्व पद कर्मधारय समास

विशेषणों भय पद कर्मधारय समास

बहुब्रीही समास :

बहुब्रिही समास की परिभाषा : ऐसा समास जिस के समस्त पदों में कोई भी पद प्रधान नहीं होता है बल्कि यह दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं|

बहुब्रिही समास के उदाहरण 

गिरी को धारण किया है जिसने (कृष्ण) – गिरिधर

लंबा है उदर जिसका (गणेश) – लंबोदर

चक्र है पाणी में जिसके (विष्णु) – चक्रपाणि

मृत्यु को जीतने वाला (शिव) – मृत्युंजय

दश हैं आनन जिसके (रावण) – दशानन

मंत्रियों में प्रधान है जो – प्रधानमंत्री

पीला है अंबर जिसका (कृष्ण) – पीतांबर

द्वंद्व समास :

द्वंद्व समास की परिभाषा : जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और सामासिक शब्द को समास विग्रह करने पर “और”, “एवं”, या “अथवा” लगता है उसे द्वंद समाज कहते हैं|द्वंद समास में सामान्यतः दोनों पदो के बीच (–) लगता है|

द्वंद समाज के कुछ उदाहरण नीचे निम्नलिखित हैं :

द्वंद्व समास के उदाहरण 

सुख और दुख : सुख – दुख

पाप और पुण्य : पाप – पुण्य

राधा और कृष्ण : राधा – कृष्ण

भला या बुरा : भला – बुरा

माता और पिता : माता – पिता

दिन और रात : दिन – रात

आगे और पीछे : आगे – पीछे

द्विगु समास :

द्विगु समास की परिभाषा : जिस समाज का पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो और उत्तर पद प्रधान हो वह समाज द्विगु समास कहलाता है|

दिगु समास के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं :

द्विगु समास के उदाहरण 

तीन रंगों का समूह – तिरंगा

सात टापुओं का समूह – सप्त टापू

तीन भुजाओं का समाहार – त्रिभुज

चार भुजाओं का समाहार – चतुर्भुज

दो पहरो का समूह – दोपहर

सात राशियों का समूह – सप्त ऋषि

नौ प्रकार के रत्न – नवरत्न

नव रात्रियों का समूह – नवरात्रि

अव्ययी भाव समास :

अव्ययी भाव समास की परिभाषा : जिस समास का पहला पद प्रधान हो या अव्यय हो, तथा उत्तर अथवा दूसरा पद गौण हो, जो को पूर्व पद आश्रित होता है उसे अव्ययी भाव समास कहते हैं|

अव्ययी भाव समास के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं :

अव्ययी भाव समास के उदाहरण 

अनुरूप – रूप के योग्य

यथासंभव – जैसा संभव हो

आजन्म – जन्म से लेकर

पेटभर के – भर पेट

यथाशक्ति – शक्ति के अनुसार

निष्कर्ष :

अब तो आपको अच्छी तरह से समझ आ गया होगा की “समास किसे कहते हैं”, “समास की परिभाषा (samas ki paribhasha)”,” समास के प्रकार (samas ke prakar)”, “समास के उदाहरण (samas ke udaharan)”, “तत्पुरुष समास किसे कहते हैं”, “कर्मधारय समास किसे कहते हैं”, “अव्ययी भाव समास किसे कहते हैं”, “द्वंद समास किसे कहते हैं” ,”द्विगु समास किसे कहते हैं”, “बहुब्रीहि समास किसे कहते हैं|

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