आखिर, भारतीय संविधान का निर्माण कैसे हुआ ?जानिए पूरी जानकारी| constitution making of india|

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भारतीय संविधान का निर्माण

आप सबको पता ही होगा कि जब से दुनिया में शासन व्यवस्था चलती आ रही है तब से शासन व्यवस्था मानव जीवन को मूल रूप से चलाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भाग बन चुकी है|चलिए सबसे पहले थोड़ा सारांश में यह जान लेते हैं कि आखिर अपना देश अंग्रेजों का गुलाम कैसे बना था|

भारत देश गुलाम कैसे बना ?? आप सबको पता ही होगा कि 1600ई. में स्थापित ईस्ट इंडिया कंपनी ,इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ से अनुमति लेकर व्यापार करने के उद्देश्य से भारत आई और 1608 ई. में भारत देश के सूरत के बंदरगाह पर अपना पहला कदम रखा |जहां से भारत देश के लिए बुरे दिन आने शुरू हो गए |
ईस्ट इंडिया कंपनी (1600 ई.)
उस समय के मुगल बादशाह जहांगीर ने इन्हें भारत में व्यापार करने की अनुमति दे दी | क्योंकि पहले के जमाने में अपना भारत देश मसालों के व्यापार के लिए बहुत प्रसिद्ध था| अंग्रेज लोग यहां से मसाले ले जाकर ब्रिटेन में बेचते थे जिससे उन्हें 60 गुना अधिक लाभ प्राप्त होता था| ईस्ट इंडिया कंपनी के आने से पहले और भी कई कंपनियां भारत में व्यापार कर रही थी ,जैसे कि – फ्रांसीसी कंपनी ,डच कंपनी ,स्वीडिश कंपनी ,पुर्तगाली | लेकिन ईस्ट इंडिया कंपनी को जहां बैठने बस की जगह दी गई थी वही उसने अपने पैर पसार लिए और धीरे-धीरे करके अपने षड्यंत्र और कूट नीतियों से पूरे भारत देश में तबाही ला दी और भारत देश को गुलाम बना लिया|

संविधान का निर्माण कैसे हुआ ??

15 अगस्त 1947 को अपना भारत देश आजाद हुआ और उसके बाद अपने देश को अपनी खुद के संविधान और शासन व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पड़ी | वैसे तो संविधान बनाने की नीति आजादी के पहले ही चल रही थी लेकिन अंग्रेजो के चलते समय समय पर ऐक्ट के कारण हमारा संबिधान बनाने का काम पूरा नही हो सका| • संबिधान निर्माण की सर्वप्रथम माँग बालगंगाधर तिलक द्वारा 1895 में स्वराज्य विधेयक में की गयी| • संबिधान सभा के गठन का प्रथम विचार (प्रस्ताव), वामपंथी आंदोलन के प्रखर नेता “एम एन रॉय” ने 1934 में रखा| • 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार भारत के संविधान के निर्माण के लिए आधिकारिक रूप से संविधान सभा के गठन की मांग की| • 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से पंडित जवाहरलाल नेहरू ने घोषणा की कि स्वतंत्र भारत के संविधान का निर्माण वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनी गई संविधान सभा के द्वारा किया जाएगा, इसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं होगा| • 1940 में ब्रिटिश सरकार ने जवाहरलाल नेहरु की इस मांग को स्वीकार कर लिया|जिसे सन 1940 के ‘अगस्त प्रस्ताव’ के नाम से जाना जाता है| • 1942 में ब्रिटिश सरकार के कैबिनेट मंत्री सर स्टैफोर्ड क्रिप्स तथा ब्रिटिश मंत्रिमंडल के 1 सदस्य भारत के संविधान के निर्माण के लिए ब्रिटिश सरकार के एक प्रारूप के साथ भारत आए|जिसमें संविधान को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाया जाना था|इसे ‘क्रिप्स प्रस्ताव’ के नाम से भी जाना जाता है| • क्रिप्स प्रस्ताव को मुस्लिम लीग ने अस्वीकार कर दिया क्योंकि मुस्लिम लीग की मांग थी कि भारत को दो स्वायत्त हिस्सों में बांट दिया जाए जिनकी अपनी अपनी संविधान सभाएं हो| • लेकिन 24 मार्च 1946 को ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में कैबिनेट मिशन को भेजा गया जिसन मुस्लिम लीग की इस मांग को पूर्णता ठुकरा दिया|जिसे कैबिनेट मिशन योजना के नाम से भी जाना जाता है|

कैबिनेट मिशन योजना :

• कैबिनेट मिशन योजना ने संविधान सभा के सामने ऐसी योजना या प्रस्ताव रखा जिसने मुस्लिम लीग को काफी हद तक संतुष्ट कर दिया| • कैबिनेट मिशन योजना के प्रस्तावों के तहत नवंबर 1946 में संविधान सभा का गठन हुआ| • इस योजना के तहत संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 होनी थी| इनमें से 296 सीटें ब्रिटिश भारत को और 93 सीटें देसी रियासतों को आवंटित की जानी थी| • ब्रिटिश भारत को आवंटित की गई 296 सीटों में 292 सदस्यों का चयन 11 गवर्नरों के प्रांतों से और 4 का चयन मुख्य आयुक्तों के प्रांतों से किया जाना था| • हर प्रांत और देसी रियासतों को सीटें उनकी जनसंख्या के अनुपात में यानी कि प्रत्येक 10 लाख लोगों पर एक सीट आवंटित की जानी थी| • प्रत्येक ब्रिटिश प्रांत को आवंटित की गई सीटों का निर्धारण 3 समुदायों (मुस्लिम ,सिख व सामान्य) कि मध्य उनकी जनसंख्या के अनुपात में किया जाना था| • प्रत्येक समुदाय के प्रतिनिधियों का चुनाव केवल उस समुदाय के सदस्यों द्वारा किया जाना था| • देसी रियासतों के प्रतिनिधियों का चुनाव रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था| • संविधान सभा के लिए जुलाई 1946 में चुनाव हुआ| जिसमें (ब्रिटिश भारत के लिए आवंटित 296 सीटों में) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें, मुस्लिम लीग को 73 सीटें तथा छोटे समूह व स्वतंत्र सदस्यों को 15 सीटें मिली| • हैदराबाद की देसी रियासतों की 93 सीटें भर नहीं पाई, क्योंकि उन्होंने खुद को संविधान सभा से अलग रखने का निर्णय लिया था| • संविधान सभा के लिए चुनाव हो ही रहे थे तभी 8 जुलाई 1946 को कांग्रेस पार्टी (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस) ने संविधान सभा के मसौदे (सामग्रियां) तैयार करने के लिए एक कॉन्ग्रेस विशेषज्ञ समिति का गठन किया जिसमें कुल 8 सदस्य थे|

संविधान सभा की बैठकें :

• इस प्रकार 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई, इस बैठक का मुस्लिम लीग ने बहिष्कार कर दिया था ,जिसमें केवल 211 सदस्यों ने भाग लिया|
भारतीय संविधान का निर्माण
• प्रथम बैठक में सभा का अस्थाई अध्यक्ष, सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के कारण डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को चुना गया| • 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की दूसरी बैठक हुई जिसमें सभा का स्थाई अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद को चुना गया|और सभा के दो उपाध्यक्ष डॉ एच सी मुखर्जी तथा वी टी कृष्णामचारी उपाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुए| • सर बी एन राव को इसी दिन संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार के रूप में चुना गया|जिनका संविधान निर्माण में बहुत बड़ा योगदान है| इन्होंने 80 से ऊपर देशों की यात्रा की और वहां जाकर उनके संविधानों का अवलोकन कर अपने संविधान के लिए उपयुक्त नियम और कानून ले आए| • 13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में एक ‘उद्देश्य प्रस्ताव‘ पेश किया| • 22 जनवरी 1947 को ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ को संविधान सभा द्वारा स्वीकार कर लिया गया| • अभी भी मुस्लिम लीग संविधान सभा का बहिष्कार कर रही थी| इसीलिए 3 जून 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने संविधान सभा में अपनी योजना प्रस्तुत की जिसे माउंटबेटन योजना के नाम से जाना जाता है| इस योजना के तहत भारत को पाकिस्तान (मुस्लिम लीग) से अलग कर दिया गया| • माउंटबेटन योजना के तहत सदस्यों की कुल संख्या 389 से गिरकर 299 हो गई| जिसमें ब्रिटिश प्रांतों की संख्या 296 से 229 और देसी रियासतों की संख्या 93 से 70 कर दी गई| • 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया गया| • संविधान सभा ने संविधान के निर्माण संबंधित विभिन्न कार्यों को करने के लिए कई समितियों का गठन किया| • 29 अगस्त 1947 को “प्रारूप समिति” का गठन किया गया|जिसके अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर थे| • प्रारूप समिति संविधान सभा की सबसे महत्वपूर्ण समिति थी जिसका कार्य नए संविधान के लिए प्रारूप तैयार करना था|इसमें कुल 7 सदस्य थे| • विभिन्न समितियों के पेश किए गए प्रस्तावों पर विचार करने के बाद 21 फरवरी 1948 को प्रारूप समिति ने संविधान सभा के समक्ष अपना पहला प्रारूप पेश किया| • भारत के लोगों को इस पर चर्चा और संशोधन का प्रस्ताव देने के लिए 8 माह का समय दिया गया| • इस प्रकार लोगों की शिकायतों और आलोचनाओं को दूर करने के लिए प्रारूप समिति ने संविधान का दूसरा प्रारूप  अक्टूबर 1948 में प्रकाशित किया| प्रारूप समिति ने अपना प्रारूप तैयार करने में 6 माह से भी कम का समय लिया| • डॉ बी आर अंबेडकर ने 4 नवंबर 1948 को सभा में संविधान का अंतिम प्रारूप पेश किया|इस बार संविधान पहली बार पढ़ा गया|

संविधान के प्रारूप पर विचार :

• इस प्रकार संविधान पर पहली बार विचार 4 नवंबर से 9 नवंबर 1948 तक (5 दिन) चला| • संविधान पर दूसरी बार विचार 15 से 17 नवंबर 1948 तक चला|इस अवधि में कम से कम 7653 संशोधन प्रस्ताव आए, जिनमें से वास्तव में 2473 पर ही सभा में चर्चा हुई| • संविधान पर तीसरी बार विचार 14 नवंबर 1949 से शुरू हुआ| • डॉक्टर बी आर अंबेडकर ने “द कॉन्स्टिट्यूशन एज सेटल्ड बाय द असेंबली बी पास्ड” प्रस्ताव पेश किया| • इस प्रस्ताव को 26 नवंबर 1949 को पारित कर दिया गया, और 24 जनवरी 1950 को इस पर सभी अध्यक्ष व सदस्यों (284) के हस्ताक्षर लिए गए| • 26 नवंबर 1949 को अपनाए गए संविधान में एक प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी| • 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई|इस दिन संविधान सभा में कुछ महत्वपूर्ण कार्य हुए – ★ इसी दिन ‘राष्ट्रीय गान‘ को अपनाया गया| ★ इसी दिन ‘राष्ट्रीय गीत‘ को अपनाया गया| ★ इसी दिन डॉ राजेंद्र प्रसाद को ‘भारत का पहला                     राष्ट्रपति’ चुना गया| ★ आज के ही दिन संविधान सभा के 284 सदस्यों के               हस्ताक्षर लिए गए थे|(299 सदस्यों में से उस दिन               केवल 284 सदस्य ही उपस्थित थे) • इस प्रकार 26 जनवरी 1950 को भारत शासन अधिनियम 1935 को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया| जिस दिन को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं|

भारतीय संविधान से जुड़ी कुछ रोचक बातें :

• 26 जनवरी को ही संविधान लागू करने के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन सन 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में “पूर्ण स्वराज दिवस” मनाया गया था| • मूल संविधान में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी| जबकि वर्तमान समय में भारतीय संविधान में 470 अनुच्छेद 12 अनुसूचियां और 22 भाग है जो कि 25 भागों में विभाजित है| • भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है, इसके अंग्रेजी संस्करण में कुल 1,17,369 शब्द हैं| • हैदराबाद अकेली एक ऐसी रियासत थी जिसके प्रतिनिधि संविधान सभा में शामिल नहीं हुए थे| • भारतीय संविधान की मूल प्रति पर सभा के 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए ,जिनमें महिलाओं की संख्या 15 थी| • डॉक्टर बी आर अंबेडकर को “भारतीय संविधान के पिता” के रूप में पहचाना जाता है| • दिलचस्प की बात यह है की संपत्ति का अधिकार भी एक मौलिक अधिकार था, लेकिन संविधान के 44 वें संशोधन,1978 के द्वारा इसे हटा दिया गया| • भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ जिसमें शेर ,अशोक चक्र सांड और घोड़े भी हैं 26 जनवरी 1950 को ही अपनाया गया था| • भीमराव अंबेडकर संविधान सभा के गठन के वक्त बंगाल के निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित हुए थे, लेकिन जिस वक्त उन्हें प्रारूप समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया था, वे मुंबई निर्वाचन क्षेत्रों की तरफ से संविधान सभा में शामिल हुए थे| • संविधान निर्माण के लिए कुछ समितियों का गठन किया गया था जिनमें से 8 प्रमुख बड़ी समितियां हैं और 15 छोटी समितियां हैं| • संविधान निर्माण में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा और निर्माण में कुल 64 लाख रुपए का खर्च आया| • ‘एच वी आर अयंगर’ को संविधान सभा का सचिव नियुक्त किया गया था| • ‘एल एन मुखर्जी’ को संविधान सभा का मुख्य प्रारूपकार (चीफ ड्राफ्टमैन) नियुक्त किया गया था| • धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी शब्दों को 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया| • संविधान की मूल प्रति ‘प्रेम बिहारी नारायण रायजादा’ द्वारा लिखी गई थी| संविधान की मूल प्रति हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखी गई थी|   इस प्रकार 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण भारत देश को नियमित रूप से चलाने वाला एक अंगीकृत ढांचा, हमारा अदितीय संविधान पूरे देश में लागू हो गया| अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया इस पोस्ट को आगे जरुर शेयर करें ताकि वह भी भारतीय संविधान के बारे में जान सकें………. क्योंकि पढ़ेगा इंडिया, तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया|

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